नोएडा। युवराज मेहता की मौत के मामले में जांच अब लगभग अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। रविवार दोपहर 12 बजे नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन ने अपने फाइनल तर्क और पक्ष रख दिए। दो दिनों तक चले सवाल-जवाब और करीब 600 पन्नों के जवाबों के बाद अब एसआईटी दो से तीन दिन के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी।
यह रिपोर्ट केवल घटनाक्रम का विवरण नहीं होगी, बल्कि इसमें साफ तौर पर यह बताया जाएगा कि किस स्तर पर चूक हुई और किन अधिकारियों ने फैसले लेने में लापरवाही बरती। रिपोर्ट मुख्यमंत्री के लिए आगे की कार्रवाई का आधार बनेगी। संकेत हैं कि प्रशासनिक ढिलाई और सिस्टम फेलियर को इस मामले में हल्के में नहीं लिया जाएगा।
युवराज की मौत के बाद यह मामला सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार की जवाबदेही से भी जुड़ गया है। जांच पूरी हो चुकी है, सभी तर्क सामने रखे जा चुके हैं और दस्तावेज जमा हो चुके हैं। अब न कोई सफाई बाकी है और न ही कोई बहाना। रिपोर्ट सौंपे जाने के साथ ही कार्रवाई की दिशा और गंभीरता तय होगी।
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, एसआईटी रिपोर्ट में सिर्फ फील्ड स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली पूरी चेन ऑफ कमांड की भूमिका का आकलन किया गया है। किस अधिकारी के पास क्या जिम्मेदारी थी, किस समय कौन सा फैसला लिया गया या टाल दिया गया, इन सभी बिंदुओं को तथ्यों के साथ मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा।
हालांकि रविवार को एसआईटी की टीम नोएडा नहीं पहुंची, लेकिन जांच की रफ्तार धीमी नहीं हुई। टीम अंतिम स्तर पर रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटी है और अलग-अलग विभागों से मिले जवाबों का आपसी मिलान किया जा रहा है। जहां जवाबों में विरोधाभास पाए गए हैं, उन्हें रिपोर्ट में अलग से चिन्हित किया जा रहा है, ताकि पूरी तस्वीर स्पष्ट रहे।
मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद यह तय होगा कि कार्रवाई केवल विभागीय नोटिस और तबादलों तक सीमित रहेगी या निलंबन और दंडात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि जिन अधिकारियों की भूमिका गंभीर लापरवाही के दायरे में पाई गई है, उनके खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।




