नोएडा। पिता राजकुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने बेटे युवराज को कार के साथ डूबते हुए देखा। उनका आरोप है कि मौके पर करीब 80 कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन कोई भी पानी में नहीं उतरा। एसआईटी की टीम ने राजकुमार से उस रात की पूरी घटनाक्रम की जानकारी ली है।
हादसे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। कार्रवाई करते हुए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को हटा दिया गया है। साथ ही हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंपी गई है।
एसआईटी कई अहम सवालों के जवाब तलाश रही है। पौने दो घंटे तक युवक को क्यों नहीं बचाया जा सका और एनडीआरएफ को सूचना देने में देरी क्यों हुई। हादसे के बाद नोएडा के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। सोसाइटी वासियों द्वारा लिखे गए तीन पत्रों का जवाब और मांग के अनुसार काम क्यों नहीं कराया गया। भविष्य में इस तरह की घटना रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि एक तरफ पुलिस एफआईआर दर्ज कर रही थी, वहीं दूसरी ओर प्राधिकरण के पास यह तक स्पष्ट नहीं था कि प्लॉट किसका है। नियमानुसार तय समय में काम पूरा न होने पर आवंटन रद्द क्यों नहीं किया गया। तैराकी प्रशिक्षण का हिस्सा होने के बावजूद कर्मचारी पानी में क्यों नहीं उतरे, गोताखोर और स्टीमर समय पर क्यों नहीं पहुंचे और इतने संसाधन मौजूद होने के बाद भी बच्चे की जान क्यों नहीं बच पाई।
एसआईटी ने यह भी सवाल उठाया है कि डार्क स्पॉट के लिए कराए गए सर्वे में इस स्थान को कैसे नजरअंदाज कर दिया गया। हादसे के बाद बेसमेंट से कार को बाहर निकाला गया।
एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि जांच तीन राउंड में पूरी की जाएगी। पहले दिन दो राउंड पूरे किए गए और करीब पांच घंटे तक बैठक चली। उन्होंने कहा कि पांच दिन में सभी पहलुओं की जांच कर यह तय किया जाएगा कि किसकी गलती से हादसा हुआ और क्या कदम उठाए जा सकते थे जिससे यह घटना रोकी जा सकती थी। सिविक और पुलिस अथॉरिटी समेत हादसे से जुड़े सभी पक्षों की भूमिका की जांच की जा रही है और रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।
उन्होंने बताया कि पहले राउंड में बैठक और दूसरे राउंड में मौके का मुआयना किया गया है। घटना के समय मौजूद सभी लोगों से बातचीत की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उनके साथ मंडलायुक्त मेरठ भानूचंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर भी मौजूद थे।
दोपहर करीब सवा 12 बजे एसआईटी की टीम नोएडा प्राधिकरण पहुंची, जहां बोर्ड रूम में करीब साढ़े 12 बजे बैठक शुरू हुई। बैठक में कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, प्राधिकरण एसीईओ कृष्णा करुणेश और डीएम मेधा रूपम से सवाल-जवाब किए गए। इसके बाद टीम सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल पहुंची और शाम पांच से साढ़े सात बजे तक दोबारा बैठक चली।




