अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार

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ओडिशा। भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस ने रविवार को एक बड़ी कार्रवाई में राज्य की राजधानी से संचालित हो रहे एक अंतरराज्यीय साइबर अपराधी रैकेट का भंडाफोड़ किया और 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस आयुक्त एस देव दत्ता सिंह ने यह जानकारी दी। पुलिस आयुक्त ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से सात बिहार के, चार केरल के और एक ओडिशा का है। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सूचना के आधार पर कमिश्नरेट पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सुसंगठित अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया और गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया। इस गिरोह के अधिकांश सदस्य बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं।  वे पिछले कुछ महीनों से शहर के बडागढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के टैंकापानी रोड स्थित देबासिस त्रिपाठी के घर से बेहद गुप्त तरीके से यह रैकेट चला रहे थे। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में देबाशीष त्रिपाठी, अर्जुन राज उर्फ ​​बिटू (22), बिजय कुमार (24), और पंकज कुमार की पहचान की। पुलिस कमिश्नर ने आगे बताया कि यह गिरोह बिहार के कुख्यात कात्री सराय गिरोह के नाम से जाना जाता है। गिरोह मैन्युअल और साइबर दोनों तरह की धोखाधड़ी में शामिल है।  पुलिस सूत्रों ने बताया कि पंकज अपने गांव में तैनात एजेंटों के माध्यम से नापतोल, मीशो और अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ग्राहकों का पूरा डेटाबेस इकट्ठा करता था और ऑनलाइन मनी ट्रांसफर के लिए फर्जी बैंक खाते भी जुटाता था। साइबर जालसाज बिहार में अपने एजेंटों से बैंक खाता संख्या और यूपीआई हैंडल प्राप्त करते थे और शिकार लोगों को पैसा जमा करने/ट्रांसफर करने के लिए ये खाता संख्या/यूपीआई हैंडल देते थे। पुलिस ने जांच के दौरान यह भी पता लगाया कि आरोपी अपराधी फर्जी दस्तावेजों के जरिए एजेंटों से अलग-अलग मोबाइल सेवा प्रदाताओं से फर्जी प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड प्राप्त करते थे, जिनका इस्तेमाल वे ग्राहकों को फोन करने और इंटरनेट व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाने के लिए करते थे। आरोपियों ने फर्जी उपहार वाउचर विजेता, केरल लॉटरी घोटाला और फर्जी ऋण प्रस्तावों सहित तीन तरीकों से लोगों को ठगा। सनसनीखेज आरोप वेब ग्राफिक्स डिजाइनर आरोपी त्रिपाठी ने टारगेट कस्टमर्स को आकर्षित करने के लिए स्क्रैच कार्ड, उपहार वाउचर, लकी कूपन, ऑफर लेटर और फेसबुक पेज तैयार किए, जिनमें उपहार वाउचर या महंगे पुरस्कार जीतने के लिए हेल्पलाइन के तौर पर एक मोबाइल नंबर दिया गया था। इसके बाद, आरोपियों के एजेंटों द्वारा कोलकाता से डाक के माध्यम से अलग-अलग पीड़ितों को कूपन और फोन नंबर के साथ ये पत्र भेजे गए। लकी ड्रॉ कूपन को स्क्रैच करने के बाद पीड़ितों ने आरोपियों को फोन किया। पीड़ितों ने उनसे कथित रूप से जीते गए पुरस्कार प्राप्त करने के लिए 5,500 रुपए से 12,000 रुपए तक का पंजीकरण शुल्क देने को कहा।

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