धर्मांतरण मामला : डॉक्टरों के बयान दर्ज होंगे, केजीएमयू प्रकरण में एसटीएफ सक्रिय

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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से जुड़े कथित धर्मांतरण प्रकरण की जांच एक बार फिर तेज कर दी गई है। इस मामले में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने नए सिरे से जांच शुरू करते हुए विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, एसटीएफ की ओर से पैथोलॉजी विभाग और सीसीएम विभाग के विभागाध्यक्षों को नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाएगा। इसके साथ ही प्रकरण से जुड़े डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच एजेंसी इस पूरे मामले में सामने आए आरोपी रमीज के आगरा कनेक्शन की भी गहनता से पड़ताल कर रही है। एसटीएफ यह जानने की कोशिश कर रही है कि धर्मांतरण से जुड़े नेटवर्क की जड़ें किन-किन स्थानों तक फैली हैं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल रहे हैं। एसटीएफ ने जांच के दौरान फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की 160 पन्नों की रिपोर्ट को अपने कब्जे में ले लिया है और उसका विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की विशाखा समिति की रिपोर्ट का भी परीक्षण शुरू कर दिया गया है, ताकि प्रकरण के सभी पहलुओं को समग्र रूप से समझा जा सके। सूत्रों का कहना है कि एसटीएफ यह भी जांच कर रही है कि मामले के दौरान प्रशासनिक लापरवाही या आंतरिक मिलीभगत की कोई भूमिका रही या नहीं। जांच का दायरा केवल आरोपियों तक सीमित न रखकर संस्थागत स्तर तक विस्तारित किया गया है। प्रशासनिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा है कि आने वाले दिनों में जांच के आधार पर महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल एसटीएफ सभी तथ्यों और साक्ष्यों को एकत्र कर कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

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