उज्जैन। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने न्यायिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जज, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी, एसपी, कलेक्टर, मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पदों पर रहते हुए व्यक्ति को शक्ति का उपयोग जिम्मेदारी से करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुर्सी पर बैठकर शक्ति का प्रयोग करना और उसे सिर पर बैठा लेना, दोनों में अंतर है। यदि कोई अपनी शक्ति को सिर पर चढ़ा लेता है, तो खासकर रिटायरमेंट के बाद यह उसके लिए बड़ी समस्या बन सकती है। उज्जैन में विक्रमोत्सव 2025 के दौरान आयोजित ‘विक्रमादित्य का न्याय’ वैचारिक समागम में उन्होंने यह बातें कहीं। न्यायमूर्ति कैत ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में 4 लाख 64 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि जजों की संख्या सीमित है। हाईकोर्ट में 53 स्वीकृत पदों में से फिलहाल केवल 34 जज कार्यरत हैं। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने जजों की संख्या बढ़ाकर 85 करने की सिफारिश की है। इस कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आश्वासन दिया कि लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए जजों के पदों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का बड़ा बयान: सत्ता को सिर पर चढ़ाया तो रिटायरमेंट के बाद होगी मुश्किल!




