नए स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स को मिली रफ्तार, 30 जून तक डीपीआर फाइनल करने के निर्देश

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भोपाल। राजधानी में प्रस्तावित नए सेंट्रल विस्टा या स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट को प्रशासनिक स्तर पर हरी झंडी मिल गई है। सामान्य प्रशासन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में योजना के प्राथमिक स्वरूप पर सहमति बन गई है। हाउसिंग बोर्ड को 30 जून तक डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं।

डिजाइन और डीपीआर तैयार करने के लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आर्किटेक्ट फर्म का चयन किया जा चुका है। वल्लभ भवन, हमीदिया हॉस्पिटल और जेएनयू जैसे संस्थानों की डिजाइन तैयार कर चुकी मेसर्स सीपी कुकरेजा इस परियोजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट की लागत करीब एक हजार करोड़ रुपये आंकी गई है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी शासकीय विभागों से उनकी कार्यालयीन जरूरतों और संभावित स्थानांतरण को लेकर जानकारी मांगी थी। अब तक 58 विभागों के 84 कार्यालयों से जवाब मिला है। इनमें से 33 विभागों के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में स्थानांतरित होने के इच्छुक हैं। इन विभागों ने कुल 1.03 लाख वर्ग मीटर स्थान की मांग की है। जिन कार्यालयों में अभी रेनोवेशन या निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, उन्हें रोका जा सकता है। किसी भी विभाग को नई जमीन आवंटित नहीं की जाएगी, सभी को इसी परिसर में स्थान दिया जाएगा।

पुराने सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह नया कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। वर्तमान में इन दोनों भवनों का निर्मित क्षेत्रफल 76,500 वर्ग मीटर है, जबकि नए प्रोजेक्ट में लगभग 1.60 लाख वर्ग मीटर निर्मित क्षेत्र प्रस्तावित है। योजना के तहत 12 नए टॉवर बनाए जाएंगे, जिनकी वास्तुकला वल्लभ भवन के अनुरूप होगी।

प्रस्तावित डिजाइन में 12 टॉवरों की छत को जोड़कर एक परगोला संरचना बनाने का विचार है, जिससे परिसर का तापमान नियंत्रित रहेगा और सोलर ऊर्जा का उत्पादन भी किया जा सकेगा। इस पर होने वाले व्यय का विस्तृत विवरण मांगा गया है। पार्किंग व्यवस्था को अगले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। वल्लभ भवन की मौजूदा पार्किंग हटाकर टॉवर 1 और 2 का निर्माण शुरू करने की योजना है।

ग्रीन एरिया को भी बड़े स्तर पर बढ़ाया जाएगा। वर्तमान 5.84 हेक्टेयर हरित क्षेत्र को बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर किया जाएगा, जो मौजूदा से लगभग चार गुना अधिक होगा। आसपास के मेट्रो स्टेशन से आने-जाने के लिए कवर्ड फुटपाथ, हॉकर्स कॉर्नर और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सड़कों का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण भी प्रस्तावित है।

एमपी हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर गौतम सिंह के अनुसार यह परियोजना प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने, विभागों के बीच समन्वय सुधारने और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शासन की मंशा के अनुरूप परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

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