भोपाल। ईरानी डेरा अमन कॉलोनी के कुख्यात राजू ईरानी और उसके गिरोह की तलाश में छह राज्यों की पुलिस टीमें भोपाल में डेरा डाले हुए हैं। पुलिस को आशंका है कि यह डेरा लंबे समय से अंतरराज्यीय अपराधियों को संरक्षण देने का केंद्र बना हुआ है। इसी कड़ी में भोपाल पुलिस अन्य राज्यों में फैले ईरानी गिरोह के रिश्तेदारों और सहयोगियों का विस्तृत डेटा भी तैयार कर रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि भोपाल का ईरानी गिरोह वारदात के बाद नर्मदापुरम, देवास, मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे शहरों में जाकर छिपता है। वहीं, अन्य राज्यों में सक्रिय उनके रिश्तेदार और साथी अपराध के बाद अमन कॉलोनी में आकर शरण लेते हैं। गिरफ्तार किए गए गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में उनके काम करने के तरीके, शरण देने वालों और नेटवर्क की अहम जानकारियां मिली हैं।
फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार उनके ठिकानों पर दबिश दे रही है। इस बीच प्रशासन ने अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे की जमीन और मकानों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा भी यहां बने मकानों की वैधता की पड़ताल कर रही है। नियमों के खिलाफ निर्माण पाए जाने पर जल्द कार्रवाई की तैयारी है। फिलहाल राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब ईरानी और सबदर पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
पुलिस के मुताबिक, ईरानी डेरे से जुड़े अपराधी चोरी, लूट और ठगी जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए महीनों तक कबीले से दूर रहते हैं। इसे ‘सफर’ कहा जाता है। इस दौरान गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में सक्रिय रहते हैं। खास बात यह है कि हर गिरोह के साथ दो ऐसे लोग भी रहते हैं, जो सीधे वारदात में शामिल नहीं होते, लेकिन चोरी या लूट का माल सुरक्षित रूप से कबीले तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके लिए आरोपी लग्जरी कारों और बाइकों से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करते हैं।
अमन कॉलोनी का यह ईरानी डेरा पहले भी विवादों में रहा है। साल 2014 में यहां जमीन को लेकर हुए सांप्रदायिक तनाव के दौरान दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हुई थी। उस वक्त इलाके में फायरिंग, पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें करीब 39 मकानों को आग के हवाले कर दिया गया था और कई लोग घायल हुए थे। उसी घटना के बाद से यह इलाका प्रशासन और पुलिस की नजर में रहा है।




