इंदौर। एमवाय अस्पताल में कबड्डी की नेशनल खिलाड़ी रोशनी को एक्सपायरी दवा लगाए जाने के मामले में चार सदस्यीय जांच कमेटी तो बना दी गई है, लेकिन अभी तक किसी के बयान नहीं हुए हैं। अस्पताल प्रशासन लगातार यह दावा करता रहा है कि मरीज को एक्सपायर्ड दवा नहीं लगाई गई और नर्स ने तारीख देखते ही बोतल हटा दी थी। इस दावे को खिलाड़ी के पति सागर सिंह ने एक वीडियो जारी कर खारिज कर दिया। उनका कहना है कि मामला गंभीर है और वे बिना वजह कोई आरोप नहीं लगा सकते।
सागर सिंह ने अपने वीडियो में बताया कि डॉक्टर और नर्स दोषी नहीं हैं, बल्कि दवा चढ़ाने वाली नर्सिंग स्टूडेंट्स और स्टॉक संभालने वाले स्टाफ की लापरवाही है। उन्होंने कहा कि जिस दिन घटना हुई उस सुबह नर्सिंग स्टूडेंट्स ने दवा चढ़ाई थी। बोतल पर अगस्त 2025 की एक्सपायरी डेट देखकर उन्होंने नर्स को बताया, जिसके बाद बोतल बदली गई। सागर ने यह पूरा वीडियो रिकॉर्ड किया और बताया कि यही दवा पिछले दो दिनों से लग रही थी।
उन्होंने यह भी कहा कि स्टोर में रखे इसी बैच की एक्सपायर्ड दवाओं का वीडियो भी बनाया था, लेकिन उन्हें दिखाने के बाद पूरा स्टॉक हटा दिया गया। वे नहीं जानते कि दवाएं कहां ले जाई गईं, लेकिन उन्हें इस बात पर आपत्ति है कि अस्पताल प्रबंधन का बयान सच से मेल नहीं खाता।
सागर का कहना है कि वे सिर्फ इलाज के लिए आए हैं और किसी से कोई निजी शिकायत नहीं है। यहां ऐसे कई मरीज आते हैं जो पढ़े-लिखे नहीं होते और ऐसी गलती को पकड़ भी नहीं पाते। उन्होंने कहा कि अगर वे यह न देखते तो पता नहीं उनकी पत्नी के साथ क्या हो जाता।
घटना के बाद रोशनी को ड्रिप वाली दवा बंद कर टैबलेट दी जा रही है। वहीं दूसरे मरीजों को ड्रिप दवा केवल डॉक्टर की अनुमति पर ही दी जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने सभी फ्लोर और यूनिट इंचार्ज को एक्सपायर्ड दवाएं तुरंत बायो-वेस्ट में भेजने के निर्देश दिए हैं। जिन दवाओं की तारीख नजदीक है, उन पर भी अलग से निशान लगाया गया है ताकि गलती दोबारा न हो।
चार सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है, लेकिन इसमें कौन-कौन शामिल हैं, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। कमेटी मरीज, उसके पति, नर्सिंग स्टाफ, अन्य मरीज और स्टोर कीपर के बयान दर्ज करेगी। सागर सिंह का कहना है कि वे अपने बयान पर कायम हैं और उनके पास वीडियो के रूप में ठोस सबूत मौजूद हैं।




