चेन्नई। तमिलनाडु के नौ वर्षीय तमिज अमुधन इस समय विश्व शतरंज जगत में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। कम उम्र में ही उन्होंने अंडर-9 वर्ग में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी का स्थान हासिल कर लिया है और वे इस उम्र में 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी भी बन गए हैं। तमिज ने मात्र चार वर्ष की आयु में अपने चचेरे भाइयों को देखकर शतरंज खेलना शुरू किया था। उनकी प्रतिभा उस समय सामने आई जब कल्लाकुरिची के बस चालक और पार्ट-टाइम शतरंज कोच रविचंद्रन ने एक जिला स्तरीय टूर्नामेंट में उनका खेल देखा। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के भी तमिज अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर रहे थे, जिससे प्रभावित होकर रविचंद्रन ने उन्हें निःशुल्क कोचिंग देने का निर्णय लिया। इसके बाद तमिज की प्रगति तेजी से आगे बढ़ी और छह वर्ष की आयु में उन्होंने राज्य स्तरीय अंडर-9 टूर्नामेंट में नौ में से नौ अंक हासिल कर सभी को चौंका दिया। पिछले वर्ष ‘एथेंस ऑफ द ईस्ट’ शतरंज टूर्नामेंट में सिल्वर मेडल जीतना उनके करियर का यादगार पल रहा, जहां उन्हें पुरस्कार के रूप में कार भी मिली। इतनी कम उम्र में ऐसा सम्मान प्राप्त करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। तमिज की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का बड़ा योगदान है। बेहतर प्रशिक्षण के लिए उनकी मां उनके साथ लगभग 350 किलोमीटर दूर दूसरे शहर में रहकर उनका अभ्यास करवाती हैं, जबकि पिता घर पर रहकर परिवार की जिम्मेदारी संभालते हैं। तमिज के पिता का कहना है कि शतरंज एक महंगा खेल है और यात्रा, कोचिंग तथा प्रतियोगिताओं में भाग लेने का खर्च उठाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। आर्थिक कारणों से तमिज कई बार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले पाए, इसलिए परिवार अब उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए किसी बड़े प्रायोजक की तलाश कर रहा है।




