दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर टक्कर के बाद ट्रक में आग लगने से दो लोगों की मौत

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गुरुग्राम। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार को नूंह में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड सेक्शन से गिरने के बाद एक 14-पहिया डंपर ट्रक में आग लगने से दो लोगों की जलकर मौत हो गई।ट्रक बेकाबू होकर दोनों कैरिजवे के एलिवेटेड सेक्शन के बीच एक अंडरपास में 20-30 फीट नीचे गिर गया। पुलिस ने मृतकों की पहचान राजस्थान के अलवर के तिजारा के नीमली गांव के रहने वाले 57 साल के रंजीत सिंह और डीग के 24 साल के मोहम्मद परवेज के रूप में की है। सिंह ट्रक चला रहे थे जबकि परवेज को-ड्राइवर थे।पुलिस के मुताबिक, खाली ट्रक नोएडा से नीमली जा रहा था, तभी फिरोजपुर झिरका के गुजर नगला गांव के पास सुबह 4.30 बजे से 4.45 बजे के बीच यह हादसा हुआ।एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि ट्रक बेकाबू हो गया और एक्सप्रेसवे की कंक्रीट की दीवार से टकरा गया।अधिकारी ने बताया, “ट्रक लगभग 500 मीटर तक बेकाबू हुआ, मेटल गार्ड और फिर एक्सप्रेसवे की दीवार को तोड़कर दोनों कैरिजवे के एलिवेटेड सेक्शन के बीच एक अंडरपास में 20-30 फीट नीचे गिर गया। टक्कर के कारण ट्रक का केबिन कुचल गया और डीजल टैंक फट गया, जिससे पूरा ईंधन गाड़ी के नीचे फैल गया। उन्होंने बताया कि इसके तुरंत बाद ट्रक में आग लग गई, जिससे सिंह और परवेज अंदर फंस गए।पुलिस ने बताया कि जिस तरह से ट्रक अंडरपास में गिरा, उस वजह से न तो दोनों बाहर निकल पाए और न ही दुर्घटनास्थल पर जमा हुए कोई भी यात्री उन्हें बाहर निकाल पाए।जांचकर्ताओं ने बताया कि यात्रियों ने लगभग तुरंत ही पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट कर दिया था, जिसके बाद फायर टेंडर, एंबुलेंस और इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन 15-20 मिनट में मौके पर पहुंच गए। हालांकि, तब तक केबिन पूरी तरह से आग की चपेट में आ चुका था, जिससे दोनों अंदर फंस गए थे।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बचाव कर्मियों ने बाद में आग बुझाई और उनके शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए सरकारी मुर्दाघर भेज दिया। नूंह पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि ऐसा लगता है कि ड्राइवर को नींद आ गई होगी या वह बीमार पड़ गया होगा, जिस वजह से ट्रक बेकाबू हो गया। चश्मदीदों के मुताबिक, ट्रक सड़क पर लड़खड़ाते हुए चल रहा था और उसने ज़ोर से मोटी कंक्रीट की दीवार में टक्कर मार दी। उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने ट्रक के मालिक से संपर्क किया है और मरने वालों के परिवार वालों की जानकारी ले ली है। जले हुए शवों की हालत देखकर लगता है कि उन्हें संबंधित परिवार वालों को सौंपने से पहले सही पहचान के लिए डीएनए टेस्ट करवाना पड़ सकता है।

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