गुरुग्राम। शहर की हवा लगातार बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ग्वाल पहाड़ी सेंटर पर रविवार सुबह AQI 325 दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में पीएम 2.5 का स्तर 457 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 का स्तर 446 तक पहुंच गया। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों, खासकर बुजुर्गों और बीमारों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। स्कूलों से भी कहा गया है कि पांचवीं तक के बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास जारी रखें।
प्रदूषण नियंत्रण के दावों के बावजूद कई विभागों की लापरवाही भी सामने आ रही है। निर्माण स्थलों पर GRAP-3 के नियमों का पालन नहीं हो रहा, डीजल वाहनों की रोक कागजों तक सीमित है और रात में बड़े पैमाने पर बाहर से आने वाले ट्रकों का धुआं हवा को और खराब कर रहा है। कई इलाकों में कचरा खुले में जलाया जा रहा है और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ा रहा है। टूटे और धूलभरे रास्ते स्थिति को और खराब कर रहे हैं। नमी और धीमी हवा के कारण प्रदूषक जमीन के पास ही अटके हुए हैं।
हॉस्पिटल में सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार पीएम2.5 फेफड़ों में जमा होकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगों को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि बिना कदम उठाए दिसंबर में हालात और बदतर हो सकते हैं।
डीसी अजय कुमार ने कहा कि कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है और प्रशासन लगातार निरीक्षण व कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों के साथ तालमेल बढ़ाया जा रहा है ताकि प्रदूषण नियंत्रण की योजनाएं जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हो सकें। उन्होंने नागरिक समाज, RWAs और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग को सराहा और कहा कि युवाओं की बढ़ती भागीदारी बदलाव की उम्मीद को मजबूत करती है।




