गाजियाबाद। मीरपुर गांव में डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन ने रविवार रात उग्र रूप ले लिया। प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने पहुंची पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हो गई, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन हटाने की कोशिश की, महिलाओं और बुजुर्गों को दौड़ाकर पीटा और लाठीचार्ज किया। वहीं पुलिस का कहना है कि किसानों ने पहले पथराव किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
किसानों के मुताबिक वे रविवार रात से मीरपुर गांव के बाहर धरने पर बैठे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं को खेतों में दौड़ाया और गिरने के बाद घसीटकर पीटा। इस दौरान कई महिलाएं और बुजुर्ग घायल हो गए, जबकि एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 25 लोग घायल हुए हैं, एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है और एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया।
स्थिति बिगड़ने पर भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। मौके पर डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी और एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम के नेतृत्व में पुलिस ने कार्रवाई की और डंपिंग ग्राउंड स्थल को खाली कराया। इसके बाद ग्रामीण करीब 100 मीटर दूर मंदिर परिसर में बैठकर फिर धरने पर बैठ गए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह डंपिंग ग्राउंड यमुना खादर क्षेत्र के किनारे बनाया गया है, जहां पूरे इलाके का कचरा डाला जाता है। इससे आसपास के गांवों में बदबू फैलती है और लोग बीमार पड़ रहे हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि यहां कूड़ाघर हटाकर स्कूल या अस्पताल बनाया जाए।
भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि डंपिंग ग्राउंड सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया है और वे मौके पर जाकर स्थिति देखेंगे। वहीं एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि किसान ताला तोड़कर अंदर घुस गए थे और ईंट-पत्थर फेंके गए, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस का दावा है कि लाठीचार्ज नहीं किया गया, सिर्फ हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया।
फिलहाल किसान धरने पर डटे हुए हैं और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। मामला ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र का है।




