गाजियाबाद। डीएम रविन्द्र कुमार ने सख्त कार्रवाई करते हुए 35 विभाग के अधिकारियों का वेतन रोक दिया. इससे प्रशासन अब जनता की आवाज को नजरअंदाज़ नहीं करेगा. शिकायतों के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ यह फैसला जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम है.गाजियाबाद. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में जन शिकायतों के निस्तारण में लगातार लापरवाही बरत रहे अधिकारियों के खिलाफ डीएम रविन्द्र कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है. जिलाधिकारी ने 35 विभागों के अधिकारियों का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं. कारण यह है कि सितंबर महीने में इन अधिकारियों को आईजीआरएस (Integrated Grievance Redressal System) पोर्टल पर जनता से एक भी संतुष्ट फीडबैक प्राप्त नहीं हुआ. डीएम ने साफ कहा है कि जब तक शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण नहीं किया जाएगा और जनता संतुष्ट नहीं होगी, तब तक वेतन जारी नहीं होगा. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आईजीआरएस पोर्टल पर जनता द्वारा दर्ज की गई शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध और संतोषजनक तरीके से नहीं किया जा रहा था. जिलाधिकारी ने पाया कि कई विभागीय अधिकारी शिकायतों को सिर्फ “औपचारिकता” के रूप में निपटा रहे थे, जिससे लोगों की असंतुष्टि लगातार बढ़ रही थी. सितंबर माह के आंकड़ों के अनुसार, इन 35 विभागों के किसी भी अधिकारी को जनता से सकारात्मक प्रतिक्रिया या फीडबैक नहीं मिला. यही कारण रहा कि डीएम ने कठोर कार्रवाई करते हुए वेतन रोकने का आदेश दिया.डीएम रविन्द्र कुमार का सख्त संदेशजिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कहा कि आईजीआरएस पोर्टल सरकार का ऐसा डिजिटल मंच है जो जनता और प्रशासन के बीच सीधा संपर्क स्थापित करता है. यदि शिकायतें गुणवत्तापूर्ण ढंग से नहीं सुलझेंगी, तो इस व्यवस्था का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा. डीएम ने चेतावनी देते हुए कहा- “जब तक सुधार नहीं होता और जनता से संतुष्ट फीडबैक नहीं मिलता, तब तक किसी भी अधिकारी का वेतन जारी नहीं किया जाएगा.” उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिकायतों की गंभीरता को समझते हुए प्राथमिकता से निस्तारण करें और जनता से व्यक्तिगत संवाद स्थापित करें ताकि समाधान पर संतोषजनक प्रतिक्रिया मिल सके.35 विभागों पर गिरी गाज, आगे और जांच होगीजिन विभागों का वेतन रोका गया है, उनमें अधिशाषी अभियंता प्रांतीय खंड, जिला खेल अधिकारी खेल कूद, परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, जिला दिव्यांगजन अधिकारी सहितब अन्य विभाग शामिल हैं. डीएम ने यह भी निर्देश दिया है कि अगले 15 दिनों के भीतर सुधार रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. यदि आगे भी जनता से सकारात्मक फीडबैक नहीं मिला, तो विभागीय कार्रवाई और अनुशासनात्मक दंड का सामना करना पड़ेगा. जिलाधिकारी का यह निर्णय जवाबदेह और पारदर्शी शासन व्यवस्था की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है. इससे जहां अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं जनता का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा. आईजीआरएस प्रणाली का उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष समाधान करना है. इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि अब कुर्सी पर बैठे अधिकारी केवल औपचारिकता नहीं निभा पाएंगे, बल्कि उन्हें जनता की संतुष्टि सुनिश्चित करनी होगी.
गाजियाबाद में डीएम का बड़ा कदम, 35 विभागों के अधिकारियों का रोका वेतन




