फरीदाबाद। सेक्टर-15 स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के परिवार की करीब 1.50 करोड़ रुपए की गोल्ड और सिल्वर ज्वैलरी गायब होने के मामले में पुलिस ने ब्रांच मैनेजर समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि बैंक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या दस्तावेज नहीं दिए गए, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई।
सेक्टर-15ए निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट डीसी गर्ग ने पुलिस को बताया कि उनका एसबीआई सेक्टर-15 ब्रांच में वर्ष 2014 से खाता है और उसी से जुड़े लॉकर का वे नियमित उपयोग कर रहे थे। लॉकर का सालाना शुल्क भी खाते से कटता रहा और लॉकर की मूल चाबी उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने लॉकर में करीब एक किलो सोने और तीन किलो चांदी के गहने रखे थे।
डीसी गर्ग के अनुसार, करीब आठ महीने पहले लॉकर का आखिरी बार उपयोग किया गया था। 30 जनवरी को जब उनकी पत्नी नीलम गर्ग लॉकर देखने बैंक पहुंचीं तो कर्मचारियों ने बताया कि संबंधित लॉकर वहां मौजूद ही नहीं है और वह किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। लॉकर तक पहुंचने के बाद जब चाबी से ताला नहीं खुला तो मामले की जानकारी डीसी गर्ग को दी गई।
इसके बाद डीसी गर्ग ने बैंक मैनेजर पवन रावत से संपर्क किया, जहां उन्हें बताया गया कि उनका लॉकर तोड़ दिया गया था और नया ताला लगाकर उसे विकास चौहान नामक अन्य ग्राहक को सौंप दिया गया है। जब उस ग्राहक को बुलाकर लॉकर खोला गया तो उसमें रखा सोना-चांदी गायब मिला। बैंक प्रबंधन इस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
मामले की शिकायत सेक्टर-15 पुलिस चौकी में दी गई। पुलिस ने बैंक से यह स्पष्ट करने को कहा कि लॉकर सरेंडर करने के क्या दस्तावेज हैं, क्योंकि बैंक का दावा था कि लॉकर सरेंडर किया गया था। नोटिस के बावजूद बैंक कोई ठोस कागजात पेश नहीं कर सका।
इसके बाद पुलिस ने ब्रांच मैनेजर पवन रावत सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और बैंक रिकॉर्ड व जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी।




