फरीदाबाद। सेक्टर-24 में सोमवार शाम जिन दो कंपनियों में आगजनी की घटना हुई थी, उसमें बड़ा खुलासा हुआ है। फायर विभाग की जांच में सामने आया है कि कालका जी लुब्रिकेंट और शिव स्टील कंपनी के पास फायर विभाग से कोई एनओसी (NOC) नहीं थी। विभाग के रिकॉर्ड में अब तक ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि दोनों कंपनियां फायर एनओसी लेकर संचालित की जा रही थीं।
जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी मालिकों ने लोहे काटने में इस्तेमाल होने वाले इंडस्ट्रियल ग्रीस और लुब्रिकेंट केमिकल को सुरक्षा मानकों के बिना मशीनों के पास रखा हुआ था। 16 फरवरी की शाम कंपनी में सीएनसी मशीन से मेटल शीट कटिंग हो रही थी। इसी दौरान मशीन से निकली चिंगारी से केमिकल के 200 लीटर ड्रम में ब्लास्ट हो गया। इसके बाद कंपनी के बाहर रखे अन्य ड्रमों में लगातार विस्फोट होने लगे और आग फैलती चली गई।
इस हादसे में 2 फायर ब्रिगेड कर्मी, 3 पुलिस कर्मचारी सहित कुल 42 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 8 घायलों को दिल्ली के एम्स और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
ब्लास्ट के बाद पुलिस ने इलाके में नाकाबंदी कर दी है। घटना स्थल वाली सड़क को दोनों तरफ से बंद कर दिया गया है और पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई है। प्रशासन ने सुरक्षा के चलते आसपास की करीब 50 छोटी-बड़ी वर्कशॉप बंद करा दी हैं। वहीं पूरे इलाके की बिजली सप्लाई भी बंद कर दी गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र में पिछले 10 साल से दुकानों में केमिकल बेचने का काम चल रहा था। दुकानों का निर्माण करीब 15 साल पहले हुआ था। इन्हीं दुकानों से सटा मुजेसर गांव है, जिसकी आबादी करीब 40 हजार है। लोगों का कहना है कि यदि फायर ब्रिगेड और पुलिसकर्मियों ने समय रहते आग पर काबू नहीं पाया होता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
बताया जा रहा है कि दुकानदारों ने सड़क पर अतिक्रमण कर केमिकल के ड्रम रखे हुए थे। वार्ड नंबर-3 के पार्षद रवि कश्यप ने इसको लेकर कई बार प्रशासन को शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
फायर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कंपनियों को एक ही जगह से ऑपरेट किया जा रहा था। सीएनसी मशीनों के आसपास और निकासी गेट के पास भी ऑयल से भरे ड्रम रखे थे। आग लगने के बाद इन्हीं ड्रमों में एक-एक कर विस्फोट शुरू हुआ, जिससे स्थिति और भयावह हो गई।
मुजेसर थाना पुलिस ने फैक्ट्री मालिक विजय मोगरे और मैनेजर अभिषेक के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला हादसे में घायल कांस्टेबल अजनेश कुमार की शिकायत पर दर्ज हुआ। पुलिस ने आरोपियों पर CrPC की धारा 115(2), 118(1) और 124(1) लगाई है। एडवोकेट नरेंद्र चौहान के अनुसार धारा 118(1) के तहत खतरनाक हथियार, आग या विस्फोटक पदार्थ से गंभीर चोट पहुंचाने पर उम्रकैद तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यह गैर-जमानती अपराध है और जमानत केवल सेशन कोर्ट से ही मिल सकती है।
इस आगजनी में फैक्ट्री के बाहर खड़ी दर्जनभर गाड़ियां और बाइक भी आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गईं। ब्लास्ट से लगी आग ने आसपास खड़े वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया।
हादसे में कांस्टेबल अजनेश कुमार, SPO अभिषेक और PSI रवि समेत मुजेसर थाना पुलिस के कर्मचारी झुलस गए। वहीं फायर विभाग के भी दो कर्मचारी घायल हुए हैं। इनके अलावा रविंद्र, मनोज, राकेश, सुमित, विपिन, अनीश, विजय, लुकमान, जगराम और मुन्ना सहित कई अन्य लोग भी झुलसे हैं।
मामले की जांच के लिए डीसी आयुष सिन्हा ने एक कमेटी गठित की है, जिसमें अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। पुलिस की टीमें भी लगातार मौके पर जांच कर रही हैं।




