दिल्ली। देश के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को कार्यभार संभालते ही सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया में अहम बदलाव किया और अर्जेंट मामलों की मौखिक मेंशनिंग को रोकते हुए स्पष्ट किया कि अब केवल लिखित मेंशनिंग स्लिप ही मान्य होगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ असाधारण परिस्थितियों, जैसे मौत की सजा या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में ही मौखिक मेंशनिंग सुनी जाएगी। 24 नवंबर को 53वें CJI के रूप में शपथ लेने के बाद पहले ही दिन उन्होंने दो घंटे में 17 मामलों की सुनवाई की और कई अहम निर्देश जारी किए। इससे पहले पूर्व CJI संजीव खन्ना ने मौखिक मेंशनिंग बंद की थी, जिसे बाद में जस्टिस बी.आर. गवई ने बहाल किया था। न्यायपालिका में अपनी सरलता और कर्मठता के लिए पहचाने जाने वाले जस्टिस सूर्यकांत अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रमुख भी होंगे। समारोह के दौरान पूर्व CJI गवई ने अपनी आधिकारिक गाड़ी वहीं छोड़कर एक नई परंपरा की शुरुआत की। श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रमों और सुनवाई के बीच उनके परिवार, साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि और सादगीपूर्ण जीवन की झलक भी सामने आई, जिसमें दहेज लेने से इंकार से लेकर शिक्षा और न्याय के प्रति समर्पण तक की कहानियां शामिल हैं।




