दिल्ली। राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कड़ा सवाल उठाया। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि आज के समय में कार एक स्टेटस सिंबल बन चुकी है और इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लोग कार खरीदने के लिए पैसे बचाते हैं, जबकि साइकिल जैसे साधनों का इस्तेमाल लगभग खत्म हो गया है।
यह टिप्पणी सेंटर फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी के सुझाव पर आई। द्विवेदी ने दलील दी थी कि प्रदूषण कम करने के लिए एक परिवार में कई कारें रखने पर रोक लगाई जानी चाहिए, लेकिन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इतनी ताकतवर हो गई है कि इस तरह के फैसले लेना मुश्किल हो गया है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि CAQM वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि न तो बिगड़ते AQI के कारणों की पहचान को लेकर कोई जल्दबाजी है और न ही लंबे समय के समाधान तलाशे जा रहे हैं। जब एयर क्वालिटी लगातार खराब हो रही है, तब एजेंसियां आखिर कर क्या रही हैं, यह साफ नहीं है।
कोर्ट ने CAQM को निर्देश दिए कि दिल्ली और NCR में प्रदूषण के असली कारणों की पहचान की जाए और दो हफ्तों के भीतर विशेषज्ञों की बैठक बुलाकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि अलग-अलग तकनीकी संस्थानों की रिपोर्ट में प्रदूषण के स्रोतों को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। कई रिपोर्ट्स में परिवहन और उत्सर्जन क्षेत्र की हिस्सेदारी 12 से 41 प्रतिशत तक बताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अमीर वर्ग को हाई-एंड पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, लंबे समय से सुनवाई और विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद दिल्ली-NCR की हवा में सुधार नहीं हुआ, बल्कि हालात और बिगड़ते चले गए हैं।
अदालत ने नगर निगम और अन्य एजेंसियों के हलफनामों पर असंतोष जताते हुए कहा कि समाधान खोजने के बजाय टोल प्लाजा को आय का साधन बनाए रखने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। कोर्ट ने याद दिलाया कि 17 दिसंबर को ट्रैफिक जाम और प्रदूषण कम करने के लिए NCR में टोल प्लाजा अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया था।
इससे पहले 17 दिसंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजना बनाने के निर्देश दिए थे। वहीं, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए राज्यों की योजनाओं की हर महीने समीक्षा करने और सेक्टर-वार जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।




