नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी को दी गई जमानत रद करने की अर्जी खारिज कर दी है। एडिशनल सेशन जज गौरव गुप्ता दिल्ली पुलिस द्वारा दायर एक अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें बांग्लादेशी नागरिक बिलाल होसेन की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी, जो अवैध रूप से भारत में घुसा था। होसेन पर आरोप है कि वह बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में लाने और उनके लिए भारतीय पहचान पत्र बनवाने में शामिल था। पुलिस ने बताया कि उसके पास से कई लोगों के नाम के आधार कार्ड और पैन कार्ड मिले थे। जांच अधिकारी के अनुसार बरामद किए गए आधार कार्ड का अभी वेरिफिकेशन होना बाकी है क्योंकि वे यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथाॅरिटी ऑफ इंडिया से जवाब का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने 28 जनवरी के एक आदेश में कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह पता चले कि आरोपित ने आजादी का किसी भी तरह से गलत इस्तेमाल किया है या उसने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है। सिर्फ इसलिए कि आरोपी एक अवैध अप्रवासी है, उसे अनिश्चित काल के लिए हिरासत में रखने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि हालांकि भविष्य में यदि कोई नए तथ्य सामने आते हैं या जांच एजेंसी द्वारा कोई नया सबूत इकट्ठा किया जाता है जो आरोपित की हिरासत को जरूरी बनाता है, तो अभियोजन पक्ष इस संबंध में एक नई अर्जी दायर करने के लिए स्वतंत्र होगा। 24 नवंबर 2025 को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता ने होसेन को जमानत दी थी, यह देखते हुए कि सभी जरूरी चीजें बरामद कर ली गई हैं। चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है, इसलिए होसेन को सिर्फ इस वजह से जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि अन्य वांछित लोगों को अभी गिरफ्तार किया जाना बाकी है।
बांग्लादेशी घसुपैठिये की जमानत रद करने से साकेत कोर्ट का इनकार




