नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके प्रदूषण पर केंद्र सरकार और एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों और पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि कोविड लॉकडाउन के दौरान पराली तो जलाई जा रही थी, लेकिन तब हवा साफ कैसे थी?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बागची की बेंच ने साफ कहा कि पराली पर बहस को राजनीतिक रंग न दिया जाए। दिल्ली की सांस रोकने वाली हवा के कई कारण हैं और सभी का वैज्ञानिक विश्लेषण होना चाहिए। अदालत ने प्रदूषण बढ़ाने वाले कारकों में वाहन, निर्माण कार्य, औद्योगिक धूल, सड़क किनारे अवैध पार्किंग और फैक्ट्रियों के उत्सर्जन को भी अहम जिम्मेदार बताया।
CAQM और राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले की हर महीने दो बार निगरानी की जाएगी ताकि हालात दोबारा बदतर न हों।




