नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन नियामक डीजीसीए ने स्वदेशी एयरवर्दीनेस कोड लागू कर भारत की एविएशन प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब विमान और उनके पुर्जों के डिजाइन व सुरक्षा मानक यूरोप या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि भारतीय परिस्थितियों और तकनीकी जरूरतों के आधार पर तय होंगे। नए नियमों के तहत हर इंजन या प्रोपेलर को न्यूनतम 300 घंटे की फ्लाई टेस्टिंग से गुजरना होगा और किसी भी खराबी की सूचना 72 घंटे में डीजीसीए को देनी होगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी और पैसेंजर ड्रोन के लिए भी अलग मानक बनाए गए हैं, जिससे आने वाले वर्षों में देश में एडवांस्ड एयर मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।
डीजीसीए ने लागू किए स्वदेशी एयरवर्दीनेस नियम, भारत बना नियम निर्माता देश




