प्रयागराज। बुजुर्ग अफसानानिगार हशमत जान खान बमांरूफ खान हशमत शाहीन ने इलाहाबाद के एक अस्पताल में बुधवार दे रात इस दुनिया को अलविदा कह दिया। बताया जाता है कि 95 वर्षीय खान साहब का 13 अगस्त को देर रात रात करेली स्थित आवास में सीढ़ियों से अचानक पैर फिसलने से उन्हें गंभीर चोटें आई, जिसकी वजह से उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे।इलाहाबाद हाई कोर्ट से सेक्शन ऑफिसर के पद से सेवानिवृत हुए खान साहब अदबी तंजीमों से जुड़े हुए थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटी और चार बेटे हैं। मौजूदा प्रयागराज और उस जमाने का इलाहाबाद शहर के अदबी तंजीम दि हेरिटेज के संस्थापक अध्यक्ष मोहम्मद सैफ उद्दीन के मुताबिक खान साहब के अफसानों का मजमुआ सद्क़े का सुहाग, उजालों का गुलाब वे नातियां मजमुआ सहित आधा दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें इन कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के अलावा कई तंजीमों ने सम्मानित किया था। मोहम्मद सैफ उद्दीन, खान साहब के निधन पर बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि खान साहब एक खुद्दार शख्शियत थे जो अफसानों के जरिए समाज के सच को बखूबी उजागर करते रहे। उनके निधन से एक बुजुर्ग सरपरस्त की कमी हमेशा महसूस की जाएगी। गौरतलब है कि खान हशमत शाहीन साहब का अंतिम संस्कार प्रयागराज के हिम्मतगंज स्थित कब्रिस्तान में बीते बृहस्पतिवार को कर दिया गया।




