चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार को हिंदी थोपने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि उनका राज्य एक और भाषा विवाद के लिए तैयार है। 2019 में लागू नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों के लिए तीन भाषाएं सीखना अनिवार्य किया गया, जिसमें एक हिंदी होगी, जिसका तमिलनाडु में विरोध हो रहा है। भाजपा नेता अन्नामलाई ने स्टालिन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में तीसरी भाषा की अनुमति नहीं है, जबकि निजी स्कूलों में यह लागू है। इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 23 फरवरी को स्टालिन को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति भाषाई स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए छात्रों को अपनी पसंद की भाषा सीखने का अवसर देती है। उन्होंने पीएम मोदी के ‘तमिल भाषा शाश्वत है’ वाले बयान का हवाला देते हुए तमिल भाषा और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई और शिक्षा का राजनीतिकरण न करने की अपील की।
हिंदी थोपने पर तमिलनाडु तैयार करेगा नया भाषा युद्ध? स्टालिन और केंद्र सरकार आमने-सामने!




