रजनी ऑटो ड्राइवर बन हजारों महिलाओं के लिए बनी प्रेरक

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नई दिल्ली। छावला में जन्मीं 43 साल की रजनी ने ऑटो चलाकर अपने परिवार का लालन पालन खुद करती है। वह इस काम को देखकर वह हजारों महिलाओं की प्रेरक बन गई हैं। वह कहती हैं कि बच्चों को पढ़ाने और परिवार को बेहतर जिंदगी देने में इसी ऑटो ने उनका साथ दिया है। रजनी बीते चार साल से ऑटो चला रही हैं। दरअसल, उनके पति विकास कुमार सिलाई और टेलरिंग का काम करते हैं। कोविद के दौरान उनका काम बंद हो गया। रजनी के सामने दो बच्चों की पढ़ाई का खर्च और घर चलाने की परेशानी आ गई। ऐसे समय में एक स्कीम के जरिए उन्होंने एक एनजीओ की मदद से ऑटो चलाने की ट्रेनिंग ली। इस दौरान उन्हें पति और बच्चों की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा। वे ऑटो चलाने को अच्छी नजर से नहीं देखते थे। लेकिन रजनी को बच्चों की पढ़ाई ज्यादा जरूरी लगी। परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने ट्रेनिंग पूरी की।उन्हें लगा था कि अब जिंदगी आसान हो जाएगी, लेकिन मुश्किलें और बढ़ गई। महिला ऑटो ड्राइवर कम होने की वजह से दूसरे ऑटो वाले उन्हें स्टैंड पर खड़े नहीं होने देते थे, सवारी नहीं लेने देते थे और बुरा व्यवहार करते थे। यह समय उनके लिए काफी नकारात्मक रहा। घर पर बताती तो परिवार काम छोड़ने की सलाह देता था। इसी बीच उनके पति को हार्ट अटैक आया, हालात और खराब हो गए। ऐसे में रजनी ने हिम्मत नहीं हारी और ऑटो का हैडल थामे रखा। करीब एक साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई। दूसरे ऑटो ड्राइवर भी उनका साथ देने लगे सवारियों को उनका व्यवहार पसंद आने लगा। अब उन्हें सवारी ढूंढनी नहीं पड़ती, बल्कि लोग खुद बुलाते हैं। महिलाओं और परिवारों को उनके साथ सफर करना ज्यादा सेफ लगता है। कुछ सवारिया चिकचिक भी करती है, लेकिन अब उन्हें इसकी आदत हो गई है। रजनी कहती है कि महिला होने की वजह से उन्हें ज्यादा पैसेजर मिलते है और लोग प्रोत्साहित भी करते हैं। वह रोज करीब 1000 से 1200 रुपये कमा लेती है।द्वारका, महिपालपुर, गुरुग्राम बॉर्डर, उत्तम नगर, जनकपुरी जैसी जगहों तक वह अपने ऑटो से सवारिया लेकर जाती है। दोपहर 12 बजे से शाम करीब सात बजे तक ऑटो चलाती है। उनकी बेटी दिव्या ने ग्रैजुएशन पूरा करने के बाद एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 पर कंप्यूटर इंटर्नशिप शुरू की है। बेटा सिद्धार्थ एक कंपनी में मैनेजर है। बच्चे चाहते है कि वह ऑटो न चलाएं, लेकिन रजनी मानती है कि मुश्किल समय में इसी ऑटो ने परिवार को संभाला है।अब रजनी कम्युनिटी की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होने तीन महिलाओं को ट्रेनिंग लेने के लिए तैयार किया और आज वे तीनों भी ऑटो चला रही है। रजनी कहती है कि अगर हिम्मत हो तो कोई भी काम छोटा नहीं होता।

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