इंदौर। संभाग में स्टेज कैरिज परमिट पर चल रही 135 यात्री बसों में से 15 वर्ष से अधिक पुरानी 73 बसों के स्थायी परमिट रद्द कर दिए गए हैं। शेष 62 बसों के परमिट भी अगले कार्यदिवस में निरस्त किए जाएंगे। परिवहन नियमों के तहत पुरानी बसों का संचालन प्रतिबंधित है, लेकिन वाहन मालिक नोटिस मिलने के बावजूद नए मॉडल की बसें नहीं ला सके, जिस पर यह कार्रवाई की गई।
संभागायुक्त और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुदाम खाडे ने साफ किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने भी निर्देश दिए हैं कि 15 साल से अधिक पुरानी बसें किसी भी स्थिति में सड़कों पर न चलें। इसी सिलसिले में कलेक्टर शिवम वर्मा ने बस ऑपरेटरों की बैठक बुलाकर पुराने वाहनों को तुरंत बदलने के निर्देश दिए।
4 नवंबर को क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण ने 398 नए परमिट आवेदनों की सुनवाई की, जिनमें पुराने वाहनों वाले आवेदन सीधे खारिज किए जाएंगे। केवल वे परमिट स्वीकृत होंगे जिनकी बसें तय समयचक्र के अनुसार संचालित हो रही हैं। अनावश्यक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाले प्रस्ताव भी अस्वीकार किए जाएंगे।
अप्रैल 2026 से लौटेंगी सरकारी बसें
लगभग 21 साल बाद मध्यप्रदेश की सरकारी बसें फिर से सड़कों पर उतरने वाली हैं। “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना” के तहत बनाई गई नई सरकारी कंपनी अप्रैल 2026 से इंदौर में बस संचालन शुरू करेगी। निर्धारित रूटों पर निजी ऑपरेटर सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट मॉडल पर बसें चलाएंगे। इस योजना में भी आधुनिक और अपडेटेड मॉडल की बसों को प्राथमिकता दी जाएगी।




