पटना। खुद आईएएस या आईपीएस की तैयारी की लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद किताबें बेंचकर बेटा और बेटी को अधिकारी बनाने वाले एक पिता सभी के लिए प्रेरक बन गए हैं। आज इनका बेटा आईपीएस है और मौजूदा समस में बेगूसराय में डीआईजी के पद पर हैं वहीं बहू भी आईपीएस है और वह भी डीआईजी के पद पर दरभंगा में तैनात हैं।
दरअसल खेतिहर मजदूर किसान के पुत्र अनिल कुमार कई दफा यूपीएससी और कई दफा बीपीएससी एग्जाम में बैठे, लेकिन लाख कोशिशों को बाद भी परीक्षा में उतीर्ण नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने एक छोटी सी किताब की दुकान खोली। यह दुकान सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले छात्रों के किताबों की थी। पटना के सैदपुर हॉस्टल के पास मोइनुल हक स्टेडियम के पीछे अनिल कुमार ने कुमार बुक सेंटर के नाम से किताब की दुकान खोली थी। इस किताब की दुकान के खुलने का किस्सा भी अजीब था। अनिल कुमार के पास उतने पैसे नहीं थे कि वह एक छोटी सी गुमटी में इस दुकान को खोल पाए। आसपास के कुछ मित्रों ने 2000 की पूंजी इकट्ठा करके उन्हें दी। तब कुमार बुक सेंटर की स्थापना हो पायी। अनिल कुमार बताते हैं कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह दुकान खोल पाए तो कुछ-कुछ लोगों ने पांच-पांच सौ देकर मेरी पूंजी बनाई थी, तब जाकर यह दुकान शुरू हुआ था। कुमार बुक सेंटर पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों का लगातार भीड़ बढ़ने लगी। अनिल कुमार का उन छात्रों को देखकर उत्साह भी काफी बढ़ने लगा। धीरे-धीरे गुमटी से यह किताब की दुकान बन गई। उसके बाद आसपास के इलाके में प्रतियोगी परीक्षा के लिए एक जानी-मानी किताब की दुकान बन गई। 1986 में पटना में स्थापित की गई कुमार बुक सेंटर आज 40 वर्षों से अनवरत प्रतियोगी किताब, एनसीईआरटी की किताबें बेच रहा है। बीच में एक ऐसा मोड़ आया कि बच्चों को पढ़ाने के लिए अनिल कुमार को दिल्ली जाना पड़ा। ऐसे में अनिल कुमार ने किताबों से प्रेम नहीं छोड़ा। दिल्ली जाकर भी अनिल कुमार ने कुमार बुक सेंटर की स्थापना कर दी। दिल्ली के मुखर्जी नगर में छोटी सी दुकान शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे पटना की तरह वह भी बड़ी दुकान बन गई। वक्त के साथ अनिल कुमार ने जो सपना अपने बच्चों की आंखों में डाला था, वह भी पूरा हुआ। 2011 में अनिल कुमार के पुत्र आशीष भारती ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली और वह आईपीएस बन गए। इसके बाद उनकी बेटी अनीशा भारती ने पीसीएस की परीक्षा पास कर ली और वह भी अधिकारी बन गई। अब यह सिलसिला ऐसा आगे बढ़ा की अनिल कुमार की बहू स्वपना गौतम मेश्राम भी आईपीएस हैं और दामाद मोहित कुमार भी एलाइड ऑफिसर हैं।
किताबें बेचकर बेटा और बेटी को अधिकारी बनाने वाले पिता सबके लिए बने प्रेरक




