रेलयात्रीअब टिकट दिखाकर ही प्लेटफॉर्म पर जा सकेंगे

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गाजियाबाद। जीआरपी, आरपीएफ के तमाम प्रयासों के बावजूद यात्री टिकट घर के पास बने होल्डिंग एरिया में रुकने को तैयार नहीं हैं। वह सीधे प्लेटफॉर्म की तरफ जा रहे हैं। इसी को देखते हुए अब अधिकारियों ने यात्रियों को टिकट देखकर अंदर भेजने की कार्ययोजना तैयार की है।टिकट देखकर यहां पता चलेगा कि यात्री की ट्रेन कितनी देर में आएगी। यदि ट्रेन आने में आधा घंटा या उससे ज्यादा समय है तो यात्री को होल्डिंग एरिया में ठहराया जाएगा। हालांकि एक दिन पहले बृहस्पतिवार को जब आरपीएफ के जवानों ने होल्डिंग एरिया में यात्रियों को रोका तो उन्होंने उसमें बैठने के लिए कुर्सी या बेंच की व्यवस्था न होने की शिकायत दर्ज कराई। सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्ग व महिलाओं को होती है। इस बारे में सहायक सुरक्षा आयुक्त एसएस गबरियाल ने बताया कि व्यवस्था को बनाने के लिए जवानों को सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है। यात्रियों को तभी प्लेटफार्म की तरफ भेजा जाएगा, जब ट्रेन आने को होगी।भीड़ में हुआ इजाफादीपावली के अब महज दो दिन शेष बचे हैं। ऐसे में जिन लोगों का रिजर्वेशन नहीं हो पाया, वह साधारण टिकट लेकर भी ट्रेनों से अपने घरों को रवाना हो रहे हैं। सामान्य दिनों में जहां गाजियाबाद स्टेशन के काउंटर से 10 हजार टिकट बिकते थे, वहीं अब इसकी संख्या में दोगुना इजाफा हो गया है। रविवार शाम तक भीड़ में कमी होने की संभावना नहीं है। इसलिए आरपीएफ जीआरपी के जवानों की 24 घंटे डयूटी लगाई गई है।बसों में भी भीड़ बढ़ी जिन लोगों को ट्रेनों में टिकट नहीं मिल रहे हैं, वह बसाें का रुख कर रहे हैं। इस वक्त दिल्ली की तरफ से आने वाली एसी बसों में क्षमता से डेढ़, दोगुना तक यात्री बैठाकर ले जाए जा रहे हैं। सेक्टर 62 के सामने स्थित कट, लालकुआं और गोल्ड लिंक के सामने बिहार, पूर्वांचल जाने वाले यात्रियों के झुंड के झुंड खड़े हैं। खास बात यह है कि एक यात्री से साढे तीन, चार हजार तक किराया वसूला जा रहा है। जबकि, त्योहार से पहले 1800 से दो हजार रुपये लिए जा रहे थे।जीआरपी ने बढ़ाई गश्तत्योहार पर भीड़ बढ़ी तो चोर भी सक्रिय हो गए हैं। जीआरपी ने अपनी गश्त बढ़ा दी। जीआरपी निरीक्षक दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि तीन चोरों को जीआरपी ने दबोचा। इनमें गोंडा का गुडडू, शिवहर के शिवम व कानपुर के सर्जित श्रीवास्तव शामिल हैं। उनसे यात्रियों के 11 मोबाइल मिले। पूछताछ में पता चला कि यह लोग मोबाइल के पुर्जे अलग-अलग बेचते थे और सिम साइबर ठगों को दे देते थे। इसके बदले उनको पांच से छह हजार रुपये मिलते थे। साइबर ठग इन सिमों का इस्तेमाल लोगों से संपर्क साधने में करते थे। इस बारे मेें सीओ सुदेश गुप्ता ने बताया कि टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। पकड़े गए तीन आरोपियों से पूछताछ में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। उनको भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

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