गाजियाबाद: मध्यम कद और गठीले शरीर, सफेद रंग की वर्दी, सिर पर बेहतरीन साफा, हाथ में लाल रंग की एक फाइल और हमेशा चेहरे पर मुस्कान लिए एक शख्स नगर आयुक्त के साथ हर वक्त साए की तरह रहते है। इनका नाम है जोगिंदर सिंह। पूरे शहर में लोग इन्हें प्यार से ‘झुग्गी’ कहते है। जब गाजियाबाद में नगर निगम न होकर सिटी बोर्ड हुआ करता था उस समय से लेकर अब तक जोगिंदर सिंह नगर निगम की पहचान बने हुए हैं।एक बार निलंबित भी हुए, मैडम ने बहाल करायाजोगिंदर ने कहा कि हमें पूरी सर्विस में दो महीने के लिए सस्पेंड भी किया गया। हालांकि, उसमे मेरी कोई गलती नहीं थी। उस समय नगर आयुक्त अब्दुल समद थे। एक पत्रकार उनके केबिन में हमारे मना करने के बाद भी घुस गए। इसकी वजह से वह नाराज हो गए और हमे सस्पेंड कर दिया। कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी आई और पूछा कि झुग्गी कहां है। जब उन्हें पता चला कि मुझे सस्पेंड कर दिया गया है तो उन्होंने तुरंत साहब से बहाल करने के लिए कहा और अगले दिन से मै बहाल हो गया। इस पेशे में मुझे जितनी पहचान और इज्जत मिली है कि पूरा शहर मुझे जानता है।रिटायरमेंट के बाद संविदा पर कर रहे कामयही वजह है कि किसी भी नगर आयुक्त से अधिक लोग जोगिंदर सिंह को जानते है। हालांकि, जुलाई में रिटायरमेंट के बाद वह संविदा पर काम कर रहे हैक्स। जोगिंदर बताते हैं कि 1979 में वह इस विभाग में आए थे। उस समय नगर निगम नहीं बल्कि सिटी बोर्ड हुआ करता था। इस शहर को उन्होंने अपनी आंखों के सामने एक परंपरागत शहर से हॉट सिटी के रूप में आकार लेते हुए देखा है।
46 साल में 22 अफसर इधर से उधर, लेकिन अर्दली “झुग्गी ” की कहानी बहुत ही दिलचस्प




