कर्नाटक। पड़ोसियों के बीच झगड़े और बहस को आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा अपराध मानने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। 2008 के एक मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महिला को तीन साल की सजा सुनाई थी, लेकिन जस्टिस बीवी नागरत्ना और के वी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि सामान्य विवाद या हाथापाई को आत्महत्या के लिए मजबूरी नहीं माना जा सकता और आरोपी को बरी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला पड़ोसी झगड़े पर नहीं बनता उकसावे का केस




