-मेरठ के चर्चित हाशिमपुरा सामूहिक गोलीकांड का किया था खुलासा।
नई दिल्ली। भारतीय हिंदी पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम वीरेंद्र सेंगर की नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में 7 नवंबर को दो पुस्तकों “आगे और आग़ है, सच के सिवाय” नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। इस मौके पर देश के माने जाने पत्रकारों के अलावा शिक्षाविद और ब्यूरोक्रेट से लेकर तमाम क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियां कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हाल में मौजूद रही। पुस्तक विमोचन समारोह की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री सोमपाल शास्त्री ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विभूति नारायण राय के अलावा गरिमा में उपस्थिती के रूप में मीडिया जगत का जाना पहचाना नाम कमर वहीद नकवी तो वही मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल मौजूद रहे। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री,संतोष भारती, राजेश रपरिया के अलावा वीरेंद्र सेंगर की पत्नी रीता भदोरिया व आलोक भदोरिया समेत परिवार के कई लोग मौजूद रहे। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पुस्तक विमोचन समारोह में एक बार फिर वर्ष 1987 में हुए मेरठ के हाशिमपुरा और मलियाना सामूहिक हत्याकांड की यादें ताजा हो उठी। 22 और 23 मई 1987 को मेरठ के हाशिमपुरा और मलियाना गांव में हुए गोलीकांड में तक़रीबन सवा सौ बेगुनाह मुसलमानों को, जो ज़्यादातर नौजवान थे कथित तौर पर पुलिस और पीएसी की गोलियों से भून दिया गया था । पीएसी और पुलिस की इस बर्बरता का खुलासा वीरेंद्र सेंगर ने अपनी खोजी रिपोर्ट के माध्यम से किया था। इसके बाद यह सामूहिक हत्याकांड अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में छाया रहा। एक और खास बात यह है कि उस वक्त गाजियाबाद के पुलिस कप्तान विभूति नारायण राय थे जिन्होंने अपना दायित्व समझते हुए जांच को अंजाम तक पहुंचाया। तत्कालीन पुलिस कप्तान विभूति नारायण राय आज इस पुस्तक विमोचन समारोह में मौजूद थे जिन्होंने अपना कर्तव्य निभाया। उन्होंने बताया कि किन विषम परिस्थितियों में उन्होंने किस तरह इंसाफ का दामन थामा। लेकिन मलियाना हत्याकांड का असल सच सामने नहीं आ सका। हाशिमपुरा हत्याकांड की परत दर परत खोलने का काम तत्कालीन चौथी दुनिया अखबार के रिपोर्टर वीरेंद्र सेंगर ने किया था जो आज हमारे बीच नहीं है। उनका निधन पिछले 26 मार्च 2025 को नैनीताल के नवकुचियाताल में अपने आवास पर दिल का दौरा पड़ने से हो गया था। कानपुर देहात के घाटमपुर के एक गांव में जन्मे 70 वर्षीय वीरेंद्र सेंगर पिछले करीब 43 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय थे। पुस्तक विमोचन समारोह के बीच श्री सेंगर लिए 2 मिनट का मौन रखा गया। पुस्तक विमोचन समारोह में तमाम वक्ताओं ने अपने विचार रखें और सभी वक्ताओं ने श्री सेंगर की निर्भीक पत्रकारिता,शालीनता और अपने वसूलों से समझौता न करने वाले पत्रकार सेंगर की जमकर तारीफ की।




