प्रीति और मुस्कान ने यूपीएससी परीक्षा पास कर नोएडा का नाम किया रोशन

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नोएडा।संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया है। नोएडा सेक्टर 82 की प्रीति चौहान को देश में 47वीं रैंक मिली है। ग्रेटर नोएडा के गांव सादोपुर की बेटी मुस्कान वर्मा को 771वीं रैंक आई है। परिणाम की घोषणा होते ही प्रीति और मुस्कान के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। नोएडा का नाम रोशन करने वाली इन दोनों बेटियों के माता-पिता, परिजन और पड़ोसियों की खुशी की सीमा नहीं रही। प्रीति चौहान ने बताया कि यह उनका दूसरा प्रयास था। पहले प्रयास में 140 वीं रैंक हासिल की थी। ट्रेनिंग पर गई, लेकिन अपनी पसंद का पद लेने के लिए दोबारा तैयारी करने का मन बनाया। नौकरी से छुट्टी लेकर और अधिक तैयारी की। उनकी मेहनत रंग लाई। अब प्रीति ने ऑल इंडिया टाॅप 50 में जगह बनाई है। प्रीति 2020-21 में महर्षि विद्या मंदिर की छात्रा रही हैं। 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर दिल्ली विश्वविद्यालय से रसायनशास्त्र से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। यूपीएससी में समाजशास्त्र विषय रहा। ग्रेजुएशन करने के साथ यूपीएससी की तैयारी भी करती रहीं। आईएएस बनने का सपना पूरा करने के लिए दिन रात एक कर दिया। पिता राजेंद्र सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। मां मधुबाला सिंह गृहिणी हैं। प्रीति बताती हैं कि उनका घर एक कमरे का है इसलिए तैयारी करने में परेशानी हाेती थी लेकिन परिवार के सहयोग से बेहतर तैयारी कर सकी। प्रीति की एक बहन और एक भाई है। वे बताती हैं कि प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी खुद ही की। मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए आनलाइन कक्षाएं ले थी। रोजाना 10 घंटे से अधिक पढ़ाई को दिया। सादोपुर गांव की बेटी मुस्कान वर्मा ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 771वीं हासिल की। दादरी के सादोपुर गांव की बेटी मुस्कान ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया है। मुस्कान बताती हैं कि उन्होंने जामिया मीलिया इस्लामिया रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी में रहकर स्वयं तैयारी की। साथ ही सीनियर्स से मदद ली। सादोपुर गांव निवासी रोहित गुर्जर ने बताया कि मुस्कान ने दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कालेज से फिजिक्स से बीएससी की पढ़ाई की। ग्रेजुएशन के साथ यूपीएससी की तैयारी भी करती रहीं। उनके पिता अनिल कुमार मल्टीमीडिया के क्षेत्र में कार्यरत हैं। मां मालती वर्मा ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। छोटी बहन भी मेडिकल की तैयारी कर रही हैं।सीमित संसाधनों में भी मुस्कान ने बेटी को अफसर बनने का अपने पिता का सपने न केवल जिंदा रखा बल्कि उसे पूरा भी कर दिखाया।

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